romantic poems for him-onlinelibrary.in



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**********Aaye The Wo Itni Der Se Ki Mera Dil Jala Diya, 
Pehle Kiwad Ko Band Kiya Fir Deepak Ko Bujha Diya,
Pehle Khel Khelne Lage Mera Seena Tatolkar,
Fir Khel Khelne Lage Apna Underwear Kholkar,
Ek Jang Si Aisi Chid Gayi Mere Palang Par,
Gole Wali Top Rakh Di Usne Meri Surang Par,
Yeh Tha Sirf 9 Minute Ka Mazaa,
Ab Bhog Rahi Hu 9 Mahine Ki Saza, 

9 Mahine Baad Ek Aisa Hoga Visfot, 

Jo Ban Jayega Desh Ke Liye Ek Or Vote…
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मेरी दिल की दुकान का टूट गया शटर ,
मैं तो सोई पड़ी थी बेखबर ,
मेरे यौवन का थम नहीं रहा तूफान ,
जुल्मी ने लूट लिया मेरा सब सामान ।
मुझे young age मे किया जिसने बदनाम , 

मैं तो थाने में लिखवा आई हूँ उसका ही नाम ,
अब सात फेरों का तू कर ले इंतजाम , 

नहीं तो शोर मचा के बस्ती मे तेरा जीना कर दूंगी हराम ।
पूरी सड़क पे लगवा दूँगी ट्रेफिक जाम ,

नहीं तो बारात लेकर आ जा कल शाम ।
पटाया तूने मुझे, पिलाकर रोज रोज पेप्सी ,
Gift मे लाकर दिया Samsung गेलक्सी,
गोल गप्पे खिलाने का था तुझे बड़ा शौक ,
तभी घुमाने ले जाता था तू चाँदनी चौक ।
मैं तो सोई पड़ी थी बेखबर ,

 मेरी दिल की दुकान का टूट गया शटर ।
चल चले आज इंडिया गेट,
खाएँगे आइस क्रीम और आमलेट ,
अब क्यूँ हो रहा है लाल पीला ,
चल दिखला दे मुझे दिल्ली का लाल किला ,
मेरे दिल में लगी है आग,
तू अकेला घूम रहा है करोल बाग ।
टूट गयी थी हम दोनों के बीच की दीवार ,
जब पिक्चर दिखा कर घुमाया तूने कुतुब मीनार ।
मैं तो सोई पड़ी थी बेखबर , 

मेरी दिल की दुकान का टूट गया शटर ।
दिल्ली मेट्रो मे कितना घूमे हम ,

साथ रहने की खाई रोज कसम,
अब तू बात कर रहा है जाने की असम ,

रुक जा वरना कर दूँगी तुझे भस्म ।
मैं तो जी रही थी अपनी दुनिया मे अलमस्त ,
तूने आकर कर दी मेरी life अस्त व्यस्त ,
शाहजहाँ ने बनवाया था अपनी बेगम के लिए ताज ,

तू भी प्रण कर ले ये आज ,
आजा अपनी हरकतों से बाज ,

रख ले दुनिया मे मेरी लाज ।
मैं तो सोई पड़ी थी बेखबर ,

 मेरी दिल की दुकान का टूट गया शटर ।
मेरे प्यार की शक्ति का नहीं है तुझे अंदाज
बेवफ़ाई की तो खा जाऊँगी जैसे कच्चा प्याज ,
तेरे प्यार में जी रही हूँ तो तेरे प्यार में मर भी सकती हूँ ,
इम्तिहान न ले मेरा ,

मैं कुछ भी कर सकती हूँ ।
बहुत हो गया अब इंतजार ,

जाने नहीं दूँगी सरहद के उस पार ,
मत समझ मुझे इतना लाचार ,

बारात लेकर आजा इस बार ।
मैं तो सोई पड़ी थी बेखबर , 

मेरी दिल की दुकान का टूट गया शटर ।


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बरसात की एक रात थी , बह गए थे हम जजबातों में ,
कर दिया था खुद को तेरे हवाले , आ कर तेरी मीठी मीठी बातों में ।
नन्ही सी जान का क्या कसूर ,पल रही है जो मेरे पेट में ,
तेरा ही अंश है जो ईश्वर ने दिया है हमे भेंट में ।
हमारे सच्चे प्यार की है यह निशानी ,
कदापि नहीं दूँगी मैं इसकी कुर्बानी ,
अब फर्ज़ निभा ले तू भी अपना ,
पूरा होगा हम दोनों का सपना ।
अब तो लेकर आ जा band बाजा बारात ,
सज धज कर दुल्हन बनूँगी मैं उस रात ,
सात फेरे लेकर एक छोटा सा घर हम बसाएँगे ,
इस नन्ही जान के संग चाँद सितारे हम सजाएँगे
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Labon ki sarsarahat se,
badan kr choor hone tak,
Main tujh ko is tarah chahoon,
Ke meri saans ruk jaye,
Khataon par khataain ho,
Na ho kuch baat kehne ko,
Main tujh main yoon sama jaau,
Ke meri saans ruk jaye,
Na himmat tujh main ho baqi,
Na himmat mujh main ho baqi,
Magar itna qareeb aaoun.
Ke meri saans ruk jaye.
Tere honton pe jab rakhoon.
Main apne hont kuch aise.
Ya teri PYAAS bujh jaye.
Ya meri saans ruk Jaye.
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रुई का गद्दा बेच कर.. मैंने इक दरी खरीद ली,
ख्वाहिशों को कुछ कम किया मैंने और ख़ुशी खरीद ली..
– सबने ख़रीदा सोना..मैने इक सुई खरीद ली,
सपनो को बुनने जितनी डोरी ख़रीद ली..


– मेरी एक खवाहिश मुझसे मेरे दोस्त ने खरीद ली,
फिर उसकी हंसी से मैंने अपनी कुछ और ख़ुशी खरीद ली..
– इस ज़माने से सौदा कर.. एक ज़िन्दगी खरीद ली,
दिनों को बेचा और शामें खरीद ली..
– शौक-ए-ज़िन्दगी कमतर से और कुछ कम किये,
फ़िर सस्ते में ही “सुकून-ए-ज़िंदगी” खरीद ली!
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अपनी प्यारी आँखों मे छूपालो मुझको,
मोहब्बत तुम से हैं चुरालो मुझको,
धूप हो या सेहर तेरा साथ चलेंगे हम,
यक़ीन ना हो तो आज़मा लो मुझको,
तेरे हर दुख को सह लेंगे हंस के हम,
अपने वजूद की चादर बना लो मुझको,
ज़िंदगी भी तेरे नाम कर दी है हमने,
बस चंद लम्हे सीने से लगा लो मुझको!!
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आखों की गहराई में तेरी
खो जाना चाहता हूँ
आज तुझे बाँहों में लेकर
सो जाना चाहता हूँ
तोड़ कर हदे मैं आज सारी
अपना तुझे बना लेना चाहता हूँ!
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हमने जो की थी मोहब्बत वो आज भी है,
तेरे जुल्फों के साये की चाहत आज भी है,
रात कटती है आज भी ख्यालों में तेरे,
दीवानों सी मेरी वो हालत आज भी है,
किसी और के तसब्बुर को उठती नहीं.
बेईमान आँखों में थोड़ी सी शराफत आज भी है।
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आसमान से तारे तोड़ लाता, अगर बस में मेरे होता
तेरे कदमो में जन्नत बिछाता, अगर बस में मेरे होता
तुझे दुनिया की सेर करा, एक नया ही जहां दिखलाता
तेरी राहों में फूल बिछाता, अगर बस में मेरे होता
तेरे ख्वाब की हक़ीक़त बन, सपने सारे सच कर जाता
तेरे दर्द को खुद पर झेल जाता, अगर बस में मेरे होता
मैं खुद को तेरा आईना और एक तस्वीर निराली बनाता
तेरे आंसू को अपनी आँखों से गिराता, अगर बस में मेरे होता
तेरे लिए एक ताजमहल बनवाता, प्यार मेरा सबको दिखलाता
खुदा बन तेरी हर एक दुआ पूरी करता, अगर बस में मेरे होता
कितनी मोहब्बत हैं तुमसे मुझे ये तुम्हे समझाने के लिए
अपना दिल तेरे दिल में धड़काता, अगर मेरे बस में होता
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होंठो पे अपने होंठ रख दूँ
आ तुझे मैं प्यार कर लू।
साँसों में साँसें घुल जाने दे
बाँहों में बाहें मिल जाने दे।
दो जिस्म हम, जान एक है
इरादे मेरे आज नहीं नेक है।
आग लग रही है, तन-बदन में
जल रहा हूँ मैं प्रेम अगन में।
लबों पे अपने लब रख दूँ
आ तुझे मैं प्यार कर लू।
एक दूजे में खो जाने दे
मुझको तेरा हो जाने दे।
आग लग रही है, तन और मन में
सुलग रहा हूँ मैं, बरसते सावन में।।
चलो ना पूरी तरह बहक जाते है
ताक़त आज अपनी आज़्माते है।
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भरी भरी सी हैं ज़िन्दगी, भावो में बहने लगा हूँ
हाँ मैं तेरे प्यार में फिर से पड़ने लगा हूँ
सोचा रुक जाएगी ज़िन्दगी, जब उसने मेरे दिल को तोडा
लेकिन तूने आके मेरी ज़िन्दगी में इसका टुकड़ा टुकड़ा जोड़ा
सपने लेने छोड़ दिया था, लगा था तनहा सा रहने
अब तू मिली ज़िन्दगी में और तेरे सपने के सागर में लगा हूँ बहने
भरी भरी सी हैं ज़िन्दगी, भावो में बहने लगा हूँ….
चली गयी थी चेहरे की हंसी आने लगे थे दुःख
तुम मिली ज़िन्दगी में अब सच हैं सारे सुख
प्यार एक शब्दो का खेल हैं. ऐसा लगा था सबसे कहने
आज तो फिर से प्यार हो गया और लगा हूँ तेरे ख्वाबो में रहने
भरी भरी सी हैं ज़िन्दगी, भावो में बहने लगा हूँ
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किसी का सवाल बन गयी
तो किसी का खयाल बन गयी
छोटी सी नाजुक कली…
और फिर गुलाब बन गयी
निखरता शबाब बन गयी
ग़ज़ल की किताब बन गयी
छोटी सी नाजुक कली…
और फिर गुलाब बन गयी
आँगन की गुड़िया अब देखो
बड़ी सी मिसाल बन गयी
छोटी सी नाजुक कली…
और फिर गुलाब बन गयी
घर की नवाब बन गयी
आशिक़ का ख्वाब बन गयी
हसीन महताब बन गयी
छोटी सी नाजुक कली…
और फिर गुलाब बन गयी
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सुनो… यूँ “चुप” से न रहा करो,
यूँ “खामोश” से जो हो जाते हो,
तो दिल को “वहम” सा हो जाता है,
कहीं “खफा” तो नही हो..??
कहीं “उदास” तो नही हो…??
तुम “बोलते” अच्छे लगते हो,
तुम “लड़ते” अच्छे लगते हो,
कभी “शरारत” से, कभी “गुस्से” से,
तुम “हँसते” अच्छे लगते हो,
सुनो… यूँ “चुप” से ना रहा करो।


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Woh suhane lamhe ab bhulaye nahi jate
Yaado k parinde yu hi udaaye nahi jate


Woh chhat par aana wo julfe lehrana
Sabhi pegaam likhkar bataye nahi jate


Woh bahana, saheli k ghar padne jana
Gali k chakkar ab aise lagaye nahi jate


Wo aangan mein aakar angithi jalana
Purane bahane to ab banaye nahi jaate


Mohalle ki shadi me saj-sanvar kar jana
Humesha toh ye jalwe dikhaye nahi jate


Woh kisi kone me chup kar aansu bahana
Aise ehsaas toh “Meet” karaye nahi jate
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