cute smile quotes for boy friend

                     cute smile quotes for boy friend  ,
   when ever i saw you i can not control myself to tease you.
your lovely smile always make me crazy.
i don't know where my sleeping went.
i am unable to sleep at night.
and when i sleep i saw you in my dreams.
if you want to read poems in English then click    
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जब से तुम मिले हो हम हम न रहे हैं


ये साँसे भी तुम्हारी है और धङ़क भी तुम रहे हो।

बैठे-बैठे खो जाती हूँ तुम में ही गुम हो जाती हूँ

अपनी तो कुछ खबर नहीं हर जगह तुम ही मिल रहे हो।

तुम्हें ढूंढते हैं हर आहट में अपनी ही किसी मुस्कुराहट में

कहने को तो अधर हमारे है पर मुस्कुरा तुम रहे हो।

हवा के इन मादक झोंको से जब भी जुल्फ मेरी लहराती है

लगता है दूर कहीं से तुम बयार बनकर स्पर्श कर रहे हो।

डराती है जब भी तन्हाइयाँ भागती हूँ हकीकत से

रूबरू कराती है तुम्हारी यादें कि तुम साथ चल रहे हो।

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कभी ये शाम ढलती है कभी ये रात होती है

तेरी इन दिलकश नजरों से जब मेरी मुलाकात होती है।

कभी सावन बरसता है कभी पतझङ सा झरता है

मेरे दिल की धड़कनों से जब तेरी बात होती है।



हवायें गीत गाती है ये कलियाँ मुस्कुराती है


भ्रमर भी गुनगुनाना है जब मन में बरसात होती है।

फूल खुश्बू बिखेरते है पंछी संदेश लाते है

तेरा दीवाना आयेगा जब ऐसी उम्मीद होती है।

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देखकर सामने तुमको हम जमाना भूल जाते है

एक बस तुम याद रहते हो बाकी सब फसाना भूल जाते है।

सोचकर आये थे थोड़ा नाराज हो लेंगे

देखकर सामने तुमको सब शिकायत भूल जाते है।

एक बस साथ तुम देना खुशी गम सब सह लेंगे

जबसे चुना है हमसफर तुमको किसी और को देखने से कतराते है।

बन गये हो जिन्दगी मेरी तुमको खोने के ख्याल से डर जाते है

रखे सलामत रब तुझे हर घड़ी मन में यही दोहराते है।



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दो पल का गुस्सा तेरे लिए बसी बेइंतहा

मोहब्बत के तले दब जाता है।

करना भी चाहूँ तेरे खिलाफ बेरूखी

सीने में धङकता तेरा दिल इसकी इजाजत नहीं दे पाता है।

जाऊं भी तो किधर तुझसे रूठकर के

तुझसे एक पल की दूरी में कहीं भी सुकून नहीं आता है।

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तू बन गया है रूह मेरी,

 जिस्म की बात अब करूं कैसे।

कम पङ जाते हैं लब्ज मोहब्बत में तेरी,

 तुझे बिन अल्फाज अब लिखूं कैसे।

तेरे आने से खिल गयी है बहारे, 

 बिन तेरे कटे पतझङ का जिक्र अब करूं कैसे।

उजाले हो गये रातों में भी संग तेरे, 

 ढलती शाम से अकेले अब मिलूं कैसे।

बस गया है नैनो में हर तरफ तू ही,

 बेगाने आँसुओ से मुलाकात अब करूं कैसे।

मेरी ख्वाहिश तो बन गया है तू ही,

 अब दिल में कोई और आरजू रखूं कैसे।

मेरा मुकम्मल ख्वाब मिल गया है मुझे, 

 बिन तेरे अब कोई तमन्ना करूं कैसे।

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तेरा दिल धङकता है, और मेरी साँस आती है 

 तुझे मैं याद करती हूँ, और गजल बन जाती है।

कदम जब बहकते है, और मंजिल दूर लगती है 

 

तू साहिल बन जाता है, और मोहब्बत लहर बन जाती है।


देखे जब तू कातिल निगाहो से, दिल पर शमसीर चलती है 

 आती हूँ तेरे आगोश में, और सब इसरारें टूट जाती है।

गिरी जबसे चाहत के समुन्दर में, मेरी रूह गोते लगाती है 

 निकलकर आ नहीं सकती, तेरी रूह रूठ जाती है।

ताउम्र साथ देना है, निगाहे ख्वाब सजाती है 

 मुकम्मल हो जहाँ अपना, नूरानी आरजू हर रोज बढती जाती है।

तेरे लिए हर रोज दर पर, खुदा से इनायतें मांगती हूँ 

 कहते हैं सजदे में सिर झुकाने से, सब दुआयें कबूल हो जाती है।

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मैं हूँ कोरा कागज आप हैं मेरे अल्फाज

जब भी लिखती हूँ जज्बात हो जाता है एक नयी कविता का आगाज।

मैं हूँ गहरी नींद आप हैं मेरा ख्वाब

जब भी जगती हूँ आधी रात हो जाता है एक नयी कविता का आगाज।

मैं हूँ बहती नदी आप है मेरा समुन्दर गहरा

जब भी गिरती बनके जल-प्रपात हो जाता है एक नयी कविता का आगाज।

मैं हूँ खिलती कली आप है मेरा भ्रमर

जब भी आता स्पर्श का आत्मिक स्वाद हो जाता है एक नयी कविता का आगाज।

मैं हूँ ढलती शाम आप हैं मेरा जगता सवेरा

जब भी होता है ह्दय में प्रेम प्रकाश हो जाता है एक नयी कविता का आगाज।

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सजा के अपने ओठों पर, आओ तुम्हें मैं गीत बना लूं।

मुस्कुरा दो देखकर तुम, आओ तुम्हें मैं गुनगुना लूं।

भुला दो अपने गम पुराने, आओ तुम्हें मैं महफिल बना लूं।

इकलौता दिल मुझको दे दो, आओ तुम्हें मैं जिंदगी बना लूं।

तुम मिले तो हुयी दुआ कबूल, आओ तुम्हें मैं खुदा बना लूं।

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जब तुम मिलने आते हो मैं फूल सी खिल जाती हूँ

फिर जाने की बात करते हो और मैं उदास हो जाती हूँ

काश ऐसा हो जाये एक दिन तुम आओ मेरे लिए….

और फिर कभी न जाओ।

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वो मेरे दिल से वाकिफ मैं उसकी रूह से वाकिफ

होती कुछ पल की तकरार फिर उमङता बेइंतहा प्यार

इश्क है बंदिशो से आजाद शब्दो से नहीं होता उसे आघात

मोहब्बत की नहीं कोई परिभाषा एहसास ही है उसकी भाषा

जो दो दिल है समझते एक दूसरे को है लिखते पढते

ये जिस्म है बस एक जरिया रूह ही है असली दरिया

जहाँ गिरकर नहीं कोई निकलता सुकून बस डूबकर ही है मिलता

जमाने की नहीं जिसे परवाह चाहत ही है जहाँ दरगाह

मैं ऐसे इश्क से वाकिफ ऐसा इश्क मुझसे वाकिफ…..

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हम तुम्हारे प्रेम में खुद को भुलाये बैठे है

प्रतीक्षा में चौखट पर नयन टिकाये बैठे है

ह्दय के पटल पर तुम्हारी छवि बसाये बैठे है

प्रियवर हम तुम्हे अपने अस्तित्व का दर्पण बनाये बैठे है।

जीवन की कश्ती में हम तुम्हे मांझी बनाये बैठे है

अपनी खुशियो के समुन्दर में हम तुम्हे पतवार दिये बैठे है

तुम्हारी स्मृति में अश्रुओं से गालो को भिगाये बैठे है

प्रियवर हम तुम्हे अपने अस्तित्व का दर्पण बनाये बैठे है।



कैसे चले तुम बिन हम तुम्हे अपनी मंजिल का हमराही बनाये बैठे है


शब्द हमारे और अधरो पर गीत तुम्हारे सजाये बैठे है

हमारी आती जाती साँसो पर तुम्हे अधिकार दिये बैठे है

प्रियवर हम तुम्हे अपने अस्तित्व का दर्पण बनाये बैठे है।

शरीर से परे प्रेम को आध्यात्मिक बनाये बैठे है

संसार से भटकते मन को तुम पर जमाये बैठे है

ह्दय की पीङा को तुम्हारी प्रीत के तले दबाये बैठे है

प्रियवर हम तुम्हे अपने अस्तित्व का दर्पण बनाये बैठे है।

ह्दय में दो आत्माओ के मिलन का अमर संगम बनाये बैठे है

मिलकर तुमसे मानो साक्षात ईश्वर से मिल बैठे है

अपने सम्पूर्ण जीवन को हम तुम्हारे नाम किये बैठे है

प्रियवर हम तुम्हे अपने अस्तित्व का दर्पण बनाये बैठे है।

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